Thursday, 2 April 2020

इस कोरोना समय में

कविता

( कोरोना लिंक्स- / मुख्य पेज - bejodindia.blogspot.com / हर 12 घंटों पर देखें- FB+ Bejod )




समय यह
जरा कठिन सा है
अधिकतर चेहरों पर
उदासी की
लकीरें खीचीं हैं
चलता -फिरता जीवन
ठहर सा गया है

खुले हाथ
बंद मुठ्ठियों में
बदल गये हैं
धड़कते दिल और
कसमसाते पैर
घर में बंद पड़े हैं
जो जहां है
बस वहीं पर
ज़म सा गया है

सैकड़ों मील दूर से
उठ कर आया है
यह कोरोना का तूफान
जिसके ज़द में
फंसे हैं
क्या आम और
क्या खास

उपाय तो
ढ़ूढें नहीं मिल रहा
फिर सामने से लड़ कर
कैसे जीती जा सकती जंग
बचाव ही है
एक मात्र समाधान
बस सब छिप कर बैठें
जब शत्रु हो बलवान

बीत जायेगा यह समय भी
खुल जायेंगे रास्ते
तब तक
सुरक्षा के सब प्रहरी
जो अपनी नींद तोड़
अपना चैन छोड़
हमारा जीवन सुरक्षित बना रहे
करें हम
उनके ज़ज्बे को सलाम

इस कोरोना के समय में
छोड़ दे हम रोना
भरे स्वयं में आत्मविश्वास
इंसान और इंसानियत पर
करें हम सब भरोसा
सावधानी बरतें
और सावधान रहें
मन में रखें विश्वास
जीतेगे हम
हारेगा कोरोना
जरुर.....!
........

 कवयित्री - श्वेता शेखर
कवयित्री का ईमेल - shweta1429@gmail.com
प्र्तिक्रिया हेतु ब्लॉग के ईमेल - editorbejodindia@gmail.com

Wednesday, 1 April 2020

मनु कहिन(22) - जिंदगी ना मिलेगी दोबारा!

ललित निबंध

( कोरोना लिंक्स- / मुख्य पेज - bejodindia,in / हर 12 घंटों पर देखें- FB+ Bejod )



अब ऐसा मैंने लिख दिया है तो  ज्यादा नकारात्मक सोचने की जरूरत नही है। वाकई मे, मैंने ऐसा कुछ नही लिखा है जिसपर, हाय तौबा मचाने की जरूरत है! जिंदगी हमेशा से ही बड़ी ही अनमोल रही है। भगवान की सबसे खूबसूरत देन मे से एक है। ऐसा कहा जाता है कि चौरासी लाख योनियों मे भटकने के बाद पुनः मानव जीवन की प्राप्ति होती है। मानव जीवन  **** बड़ी मुश्किल से प्राप्त होता है। फिर क्यूं इसे यूं ही छोड़ दिया जाए। क्यों इसे आधे अधूरे मे ही छोड़ दिया जाए। क्यूं नही जिंदगी को भरपूर जिया जाए।

वर्तमान मे हम सभी देख रहे हैं। अनुभव कर रहे हैं। मैं बात कर रहा हूं *को रोना* संकट की। पुरा विश्व एक अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रहा है। 

*कोरोना* *वायरस*  रूपी संकट के बादल सबके ऊपर मंडरा रहे हैं। कुछ कम या ज्यादा सभी इसके चपेट मे हैं। पुरी की पुरी मानव जाति संकट मे है। यह वक्त ज्यादा सोचने का नही है। अपने आप को, अपने करीबियों को , अपने परिवार को बचाने का वक्त है। आप कैसे बच और अपनों को बचा सकते हैं। बस इतना ही सोचना है। सामाजिक दूरी बनाएं, कम से कम लोगों से मिले जुलें ! घरों मे ही रहें। सुरक्षित रहें। इसी तरह से ही आप इस *को रोना* रुपी भयानक आपदा से खुद को और अपने करीबियों को बचा सकते हैं। 

आज देश आपसे कुछ नही बस इस समस्या से निपटने के लिए महज़ २१ दिन मांग रहा है। क्या अपने देश के लिए आप २१ दिन नही दे सकते हैं ? अरे, २१ दिन क्या पुरी की पुरी जिंदगी न्योछावर है देश हित मे ! *राष्ट्रवाद* की पुकार है - सिर्फ और सिर्फ २१ दिन।

जिस प्रकार हर सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी प्रकार "जिंदगी ना मिलेगी दोबारा" इसके भी दो पहलू हैं। इस २१ दिनों के लाॅक डाऊन को इंज्वॉय करें। बाध्यता की वजह से ही सही पुरी दुनिया छुट्टियां मना रही है ( मुझे क्षमा करें इस वक्तव्य के लिए) । सुरक्षा के दृष्टिकोण से घर के अंदर एक तरह से नजरबंद है हम सभी। यह मौका फिर नही मिलने वाला। भगवान न करे यह नौबत फिर से आए। पर, अगर नौबत आ ही गई है तो फिर परेशान न हों। छोटा सा कालै बादल का टुकड़ा है। हवा इसे जल्द ही बहा कर ले जाएगी। आपके देखते ही देखते यह मंज़र भी टल जाएगा ।

इसे आप अघोषित अवकाश कहें या फिर नजरबंदी*** एक ही रास्ता है। हंस कर परिवार के साथ इंज्वॉय करें। घर बैठकर पछिया हवा इंज्वॉय करें। इसका भी आनंद उठाएं। प्रदूषण मुक्त --- हां कतिपय कारणों से प्रदूषण मुक्त आवो-हवा इंज्वॉय करें। एक अभूतपूर्व शांत माहौल को इंज्वॉय करें। बच्चों के साथ, परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गुणवत्तापूर्ण जीवन जिएं। अभी तक जिन्हें शिकायत थी एक दूसरे से *** समय की वजह से*** शायद दूर हो सकेगी। सोशल मीडिया पर हम देख भी रहे हैं। भिन्न-भिन्न तरीके से लोग इस वक्त को टालने मे लगे हैं। कोई किचन मे है तो कोई बर्तन और कपड़े साफ करता हुआ दिखाई दे रहा है।  पेशानी पर बल न दें। वक्त है ,  थोड़ा ही तो बुरा है ,टल ही जाएगा। यह किसी के लिए और किसी के चाहने से रूका है भला। बस, इस वक्त को अपने सर के उपर चढ़ने न दें। थोड़ा झटकते हुए इंज्वॉय करें।यही समय की मांग है।
हां, एक और positive पहलू जो इस संकट की घडी में दिखाई  दे रहा है वो यह कि   आस पड़ोस के स्थानीय दुकानदारों ने जरूरी सामानों की आपूर्ति बनाई रखने मे कोई कोर कसर नही छोड़ी।  सरकार ने भी यथासंभव आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति कुछ नियंत्रण के साथ निर्बाध जारी रखा।

 जो सामाजिक संबंध हमारी ताकत थी , इस सामाजिक दूरी के वक्त फिर से मजबूती के साथ हमारे साथ खड़ी दिखाई दी।

हर बड़ी घटना के गुजर जाने के बाद समीक्षाओं का एक दौर शुरू होता है। इस *को रोना* संकट की भी समीक्षा होगी। कहां से और कैसे इसकी शुरुआत हुई। कैसे इसे विस्तार मिला। कहां और किसकी गलती से *को रोना* *वायरस* एक विश्वव्यापी संकट के रूप मे उभरा ? इसकी सभी पहलुओं की समीक्षा होगी।  किसी न किसी पर , ठीकरा फोड़ा जाएगा। कोई न कोई विलेन बनकर उभरेगा। किसी न किसी की तो विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगेगा। पर, यह तो आने वाले वक्त की बात है।  फिलहाल तो वक्त है लाॅक डाऊन के नियमों का शिद्दत से पालन करने का। अपने आप को बचाने का। अपने आसपास और परिवार के अन्य सदस्यों को बचाने का। साथ ही साथ इस विश्वव्यापी संकट से जूझ रहे अपने देश को बचाने का।
.......

लेखक का नाम - मनीश वर्मा
लेखक का ईमेल- itomanish@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ब्लॉग का ईमेल - editorbejodindia@g

Tuesday, 31 March 2020

धर्म नीति / विभा रानी श्रीवास्तव

हास्य कथा 

( कोरोना लिंक्स- / मुख्य पेज - bejodindia,in / हर 12 घंटों पर देखें- FB+ Bejod )



"देख लो माँ, इसका विस्तार! इसका जो जगह तय है वो इसका है ही जो मेरा जगह है उसमें से भी इसे इसका फैलाव चाहिए!

कोरोना से दुनिया त्रस्त हो रही थी। सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंस) बरतने के लिए वर्क एट होम होने की वजह से शोभा अपने शयनकक्ष में और सोहन भोजन मेज को अपना-अपना कार्यक्षेत्र निर्धारित किया। दो सप्ताह सुचारूरूप से चला। आज सुबह शोभा अपना लैपटॉप लेकर भोजन मेज पर ही कार्यालय का काम शुरू की तो सोहन ने अपनी माँ को पुकारा।

"ठीक ही तो है! जब पूरा घर शोभा का है तो सोहन! घर का आधा हिस्सा तुम्हारा है। केवल घर का आधा हिस्सा शोभा का है तो तीन तिहाई हिस्सा तुम्हारे हिस्से में आ जायेगा..!

एक बात और समझ लो.. ना जाने कितने सालों से पक्षी-जोड़ा बिना किसी लालसा के एक संग रह रहे हैं... अपने पंखों के सहारे उड़ते चले आ रहे हैं पीढ़ी दर पीढ़ी ! आज भी जैसे अनेकानेक साल पहले थे आज भी बिल्कुल वैसे ही हैं, बाग-बगीचों में,  खेतों-खलिहानों में बैठकर दाना चुगना, खतरों से अपना बचाव कर लेना.. फँसे बिना उड़ जाना... "
"माँ की बातें हमेशा न्याय संगत होती है.."शोभा के चहकने से घर का अवसाद मिट रहा था।
......
लेखिका - विभा रानी श्रीवास्तव ''दंतमुक्ता'
लेखिका का ईमेल - vrani.shrivastava@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ब्लॉग का ईमेल - editorbejodindia@gmail.com



Saturday, 28 March 2020

'कोरोना' के खौफ में इश्क हुआ बन्द (कविता)

"कोरोना बंद" पर दो बंदिशें

( कोरोना लिंक्स- / मुख्य पेज - bejodindia,in / हर 12 घंटों पर देखें- FB+ Bejod )



1
मैखाने  देखो  बंद हैं,  पैमाने  हुए  बंद
पंडितजी देखो बंद और मौलाने हुए बंद।

अल्लाह हुए बंद और भगवान हुए बंद
राहत की बात ये कि मेहमान हुए बंद।

कारोबार हुए बंद, साहूकार हुए बंद
व्यवहार देखो बंद, सरोकार हुए बंद।

रेल तक हैं बंद देखो खेल हुए बंद
जान पर बनी है तो से मेल हुए बंद।

2
लैला जो हुई बंद तो परवाने चल पड़े
दीदार की हसरत लिए दिवाने चल पड़े।

चौराहे से आगे बढे यमराज दिख गया
पिछवाड़े मेरे इश्क की फरियाद लिख गया।

कोई जा के उन्हें इश्क का सलाम कह देना
'कोरोना' के डर से बंद हैं पैगाम कह देना।।
.....

कवि - प्रकाश रंजन 'शैल', पटना।
ईमेल - prakashphc@gmail.com
इसे बिहारी भाषा में पढ़िए - यहाँ क्लिक कीजिए

सभी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं

कविता
कोविड 19, कोरोना

( कोरोना लिंक्स- / मुख्य पेज - bejodindia,in / हर 12 घंटों पर देखें- FB+ Bejod )


घर में रहें, सुरक्षित रहें ।


नई महामारी की जंग में
सभी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं । 

शिक्षा संस्थान बंद हो गए,
शिक्षक विद्यार्थी घर में अध्ययन कर रहे
शोधार्थी बंद कमरे में खोज कर रहे
लेखक रचनाओं से जन जागरूक कर रहे हैं ।

काँच की बड़ी इमारतों वाले ऑफिस,
कार्य पहले कर्मचारी बाद में
'जनता कर्फ्यू' के बाद
'वर्क फ्रॉम होम' की डिमांड कर रहे हैं ।

कुछ कारखानों के मालिक 
नौकरी करने वालों को अब
घर बैठने का हुक्म दे रहे हैं
नौकर पगार की आस लगाए दिन गिन रहे हैं ।

इक्कीस दिनों तक देश बंद एलान के बाद
राशन, सब्जी वाले अपना जेब भी भर रहे 
स्वादिष्ट पकवान बना कुछ आराम फरमा रहे तो
उधार बंद होने से कुछ दाल रोटी को तरस रहे हैं ।

लो निकल पड़े हैं घर की ओर वो सब
जो निकले थे कमाने, अकेले या कि बीबी- बच्चे संग
मिलों तय करते, रिसते हुए खून संग पैरों के छाले
चार रोज से भूखे और चेहरे को ढाँके हुए हैं ।

कुछ योग कसरत की वीडियो बना 
कुछ यहाँ का फारवर्ड मैसेज वहाँ
कुछ कोरोना की मेम्स बना 
व्हाट्सएप, फेसबुक, टिकटॉक पर शेयर कर रहे हैं ।

सभी अपना फर्ज़ अदाई खूब करे
लोग माँगे मास्क, भोजन और छत तो
कुछ घर में रहने की सलाह दे रहे और
रामायण, महाभारत के एपिसोड दिखवा रहे हैं ।

अस्पताल के बंद कमरे में मरीज
मौत से पल-पल जूझ रहे हैं 
कुछ बीमारी होने की आशंका में 
खुद को कमरे कैद किए हैं ।

सभी डॉक्टर और नर्स ईश्वर का रूप बने
पुलिस भी अबकि समय से पहले चौकन्ने हुए 
मूक मज़दूरों की आवाज़ बन, हर खबरों की तह तक जाने
पत्रकार भी जान पर खेल रहे हैं । 


कोविड 19, कोरोना 
नई महामारी की जंग में
सभी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं । 
....
कवयित्री - सीमा सिंह
पता - शोध छात्रा, मुम्बई

जा जा कोरोना जा तू / कवि - एकलव्य कुमार

गीत

( कोरोना लिंक्स- / मुख्य पेज - bejodindia.blogspot.com / हर 12 घंटों पर देखें- FB+ Bejod )



उकता गया है मन अब
जा जा कोरोना जा तू
माना तेरी ताकत को
अब और ना सता तू

उकता गया है मन अब
जा जा कोरोना जा तू
सड़कों पर है सन्नाटा
लगता न मन जरा सा
कैदी बनाया हमको
न और दे सजा तू
उकता गया है मन अब
जा जा कोरोना जा तू

आटा खतम हुआ है
डाटा खतम हुआ है
कब तक जियेंगे ऐसे
खुद सोचकर बता तू
उकता गया है मन अब
जा जा कोरोना जा तू
नित जा रहीं हैं जानें
निकले न कोई कमाने
मिलने से डर रहे सब
दूरी तो ना बढ़ा तू
उकता गया है मन अब
जा जा कोरोना जा तू

घर से निकलने बाहर
बच्चे  मचल रहे हैं
लोगों  के दिल की न ले
 अब और बददुआ  तू
उकता गया है मन अब
जा जा कोरोना जा तू

गर अब भी तू न चेता
बतला रहा हूँ बेटा
जब लू प्रचंड होगी
 फिर भस्म बनेगा तू
उकता गया है मन अब
जा जा कोरोना जा तू
             .......
             
कवि- एकलव्य कुमार
कवि का ईमेल - eklavyakesri@gmail.com
पतातिक्रिया हेतु ब्लॉग का ईमेल- editorbejodindia@gmail.com

है नियंत्रण पर्व यह, संयम बरतिये आप सब

कोरोना पर विजय हेतु आह्वाहन गीत

( कोरोना लिंक्स- / मुख्य पेज - bejodindia.blogspot.com / हर 12 घंटों पर देखें- FB+ Bejod )





है कोरोना को हराना,धैर्य रखिये आप सब।
है नियंत्रण पर्व यह, संयम बरतिये आप सब।

आप की कीमत बहुत है, आप इसको जानिये, 
देश, घर-संसार निर्भर आप पर है,  मानिये।

स्वयं को करिये सुरक्षित, घर में  रहिये आप सब।
है नियंत्रण पर्व यह, संयम बरतिये आप सब।

आपसी दूरी बनायें एक मीटर तक सखे, 
हाथ धोयें, मास्क बाँधे, स्वयं को जिन्दा रखें।

लाॅकडाउन हो गया है, मत निकलिये आप सब।
है नियंत्रण पर्व यह, संयम बरतिये आप सब।

बात मानें पुलिस की औ डॉक्टरों का मान कर-
आप निज कर्त्तव्य करिये, धर्म आपत् जान कर। 

जो लगे इस कार्य में, सम्मान करिये आप सब।
है नियंत्रण पर्व यह, संयम बरतिये आप सब।
.....
                           (कवि - हरिनारायण सिंह 'हरि')